सोरायासिस (Psoriasis) होने का कारण, लक्षण और सबसे आसान घरेलु उपाय

सोरायासिस (Psoriasis) होने का कारण, लक्षण और सबसे आसान घरेलु उपाय………………….

 

 

सोरियासिस ता सोरायासिस (Psoriasis) :

सोरायसिस स्किन में होने वाला एक irritating और क्रोनिक विकार होता है। इसके कारण स्किन पर लाल रंग के खुजलीदार चकत्ते पड़ जाते हैं जिनमें बहुत खुजली और दर्द होता है। और अक्सर स्किन के ऊपर एक मोटी सिल्वर-वाइट कलर की परत बन जाती है
इस रोग में चमडी मोटी होने लगती है और उस पर खुरंड और पपडियां उत्पन्न हो जाती हैं। ये पपडिया सफ़ेद चमकीली हो सकती हैं। इस रोग के भयानक रुप में पूरा शरीर मोटी लाल रंग की पपडीदार चमडी से ढक जाता है। यह रोग अधिकतर केहुनी,घुटनों और खोपडी पर होता है। यह रोग वैसे तो किसी भी आयु में हो सकता है लेकिन देखने में ऐसा आया है कि 10 वर्ष से कम आयु में यह रोग बहुत कम होता है। 15-40 की उम्र वालों में यह रोग ज्यादा प्रचलित है। यह रोग आनुवांशिक भी होता है जो पीढी दर पीढी चलता रहता है।

सोरायसिस के लक्षण :

स्किन में खुजली (itching), इन्फ्लामेशन और दर्द होना। यह विकार ज्यादातर घुटनों, कोहनी, हथेली और खोपड़ी में होता है। लेकिन यह शरीर के अन्य भागों में भी हो सकता है।
सोरायसिस को एक ऑटोइम्यून डिजीज (autoimmune disease) माना जाता है जिसमें इम्यून सिस्टम गलती से स्वस्थ सेल्स पर अटैक करके उनके जीवन चक्र को बदलने लगता है। सामान्य तौर पर एक सेल के पैदा होने से मरने तक का समय लगभग एक महीना होता है। लेकिन सोरायसिस होने पर यह अवधि एक हफ्ते से भी कम हो जाती है। इसके कारण स्किन पर डेड सेल्स परत के रूप में जमा होने लगते हैं।

सोरायसिस होने के कारण :

मानसिक तनाव (emotional stress), रूखी त्वचा (dry skin), सनबर्न (sunburn), धूम्रपान (smoking), शराब का सेवन, पर्यावरण में बदलाव (environmental changes), वायरल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन और कुछ मेडिसिन्स के सेवन से जैसे beta-blockers और ibuprofen.
कुछ मामलों में यह विकार पारिवारिक (inherited) भी हो सकता है। जिन परिवारों के सदस्यों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है उनमें सोरायसिस होने की सम्भावना काफी ज्यादा होती है।
चूँकि सोरायसिस का कोई परमानेंट इलाज नहीं है और इसका उपचार करना काफी मुश्किल और frustrating होता है। लेकिन आप कुछ प्राकृतिक और प्रभावी घरेलू उपचार अपनाकर इसके लक्षणों को कंट्रोल कर सकते हैं और इन्फेक्शन को रोक सकते हैं। इसके साथ ही उचित निदान और ट्रीटमेंट के लिए अपने डॉक्टर से भी जाँच कराते रहें।

सोरायासिस (Psoriasis) सबसे आसान घरेलु उपाय :

बादाम १० नग का पावडर बनाले। इसे पानी में उबालें। यह दवा सोरियासिस रोग की जगह पर लगावें। रात भर लगी रहने के बाद सुबह मे पानी से धो डालें।
एक चम्मच चंदन का पावडर लें।इसे आधा लिटर में पानी मे उबालें। तीसरा हिस्सा रहने पर उतारलें। अब इसमें थोडा गुलाब जल और शकर मिला दें। यह दवा दिन में ३ बार पियें।
स्टडीज के अनुसार मुलेठी की जड़ में glycyrrhizin नामक कंपाउंड पाया जाता है जो स्किन की redness और irritation को ठीक करता है और इससे सम्बंधित समस्यायों जैसे खुजली, rosacea और सोरायसिस को ठीक करने में काफी मदद करता है। साथ ही, इसमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज पाई जाती हैं जो स्किन के इन्फ्लामेशन को कम करती हैं और उसे स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। परसेंट मुलेठी के जेल या क्रीम को प्रभावित क्षेत्र में रोज दो बार लगायें। या फिर, दो चम्मच सूखी मुलेठी के पाउडर को तीन गिलास पानी में डालकर 40 मिनट के लिए हल्की आंच में उबालें। अब इसे ठंडा होने दें और छान लें। अब इसमें एक कपड़ा भिगोयें और प्रभावित क्षेत्र पर 10 मिनट के लिए रखें। ऐसा बार-बार करें।
पत्ता गोभी सोरियासिस में अच्छा प्रभाव दिखाता है। उपर का पत्ता लें। इसे पानी से धोलें।हथेली से दबाकर सपाट कर लें।इसे थोडा सा गरम करके प्रभावित हिस्से पर रखकर उपर सूती कपडा लपेट दें। यह उपचार लम्बे समय तक दिन में दो बार करने से जबर्दस्त फ़ायदा होता है।
एलोवेरा भी सोरायसिस के लक्षणों को जैसे skin irritation को कम करने में मदद करता है। यह स्किन पर एक प्रोटेक्टिव लेयर बना देती है जिससे उसकी हीलिंग में मदद मिलती है। साथ ही, इसमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी कंपाउंड्स पाए जाते हैं जो इन्फ्लामेशन से लड़ते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। एलोवेरा की ताजा पत्ती से पारदर्शी जेल निकाल लें। अब इसे प्रभावित क्षेत्र में लगायें। इसे तब तक लगा रहने दें जब तक कि स्किन इसे पूरी तरह से सोख ने ले। ऐसा दिन में दो-तीन बार करें।
लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज पाई जाती हैं जो सोरायसिस के लक्षणों को कम करने में मदद करती हैं। यह स्किन पर इन्फ्लमेशन फैलाने वाले lipoxygenase एंजाइम को रोकता है। साथ ही, एंटीमाइक्रोबियल एजेंट होने के कारण लहसुन स्किन के इन्फेक्शन को रोकता है। लहसुन सोरायसिस को एक से दूसरे इन्सान में फैलने से भी रोकता है क्योंकि इसमें एक्टिव कंपाउंड्स और blood purifying property होती हैं। लहसुन के तेल और एलोवेरा जेल को बराबर मात्रा में मिला लें। अब इसे प्रभावित क्षेत्र में लगायें। कम से कम 15 मिनट के लिए इसे ऐसा ही लगा रहने दें और फिर साफ पानी से धो लें। इस उपचार को रोज करें जब तक कि आपको पूरी तरह फायदा न मिल जाए। आप रोज दो-तीन लहसुन की कलियों का सेवन भी कर सकते हैं। अच्छा रिजल्ट पाने के लिए पहले लहसुन की कलियों को कूट लें और फिर 10 मिनट का इन्तेजार करने के बाद खाएं। यदि आपको लहसुन का स्वाद या गंध पसंद नहीं है तो आप लहसुन के सप्लीमेंट भी ले सकते हैं। उचित डोज जानने के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें।

पत्ता गोभी का सूप सुबह शाम पीने से सोरियासिस में लाभ होता है।
नींबू के रस में थोडा पानी मिलाकर रोग स्थल पर लगाने से सुकून मिलता है।
नींबू का रस तीन घंटे के अंतर से दिन में ५ बार पीते रहने से छाल रोग ठीक होने लगता है।
शिकाकाई पानी मे उबालकर रोग के धब्बों पर लगाये।
केले का पत्ता लगा कर ऊपर कपडा लपेटें। फ़ायदा होगा।
पीडित भाग को नमक मिले पानी से धोना चाहिये।
इस रोग को ठीक करने के लिये जीवन शैली में बदलाव करना जरूरी है। सर्दी के दिनों में ३ लीटर और गर्मी के मौसम मे 5 से 6 लीटर पानी पीने की आदत बनावें। इससे विजातीय पदार्थ शरीर से बाहर निकलेंगे।

सोरियासिस चिकित्सा का एक नियम यह है कि रोगी को 10 से 15 दिन तक सिर्फ़ फ़लाहार पर रखना चाहिये। उसके बाद दूध और फ़लों का रस चालू करना चाहिये।
ग्लिसरीन को स्किन के लिए काफी अच्छा माना जाता है क्योंकि यह स्किन को नमी प्रदान करती है और उसे सुन्दर और स्वस्थ बनाये रखने में मदद करती है। शोधकर्ताओं के मुताबित ग्लिसरीन में ग्लिसरॉल पाया जाता है जो के विकास में काफी हेल्पफुल होता है। ग्लिसरीन को सोरायसिस वाली जगह पर अच्छी तरह से लगायें। जब यह सूख जाये तो दोबारा ग्लिसरीन लगा लें। (सामान्य रूप से स्किन से ग्लिसरीन को सूखने में लगभग 9-10 घंटे लगते हैं।मतलब हर 10 घंटे में ग्लिसरीन को सोरायसिस पर लगते रहें।) आप ग्लिसरीन का इस्तेमाल सोरायसिस ठीक होने के बाद भी कर सकते हैं। क्योंकि यह स्किन की overall health के लिए फायदेमंद होती है।
रोगी के कब्ज निवारण के लिये गुन गुने पानी का एनीमा देना चाहिये। इससे रोग की तीव्रता घट जाती है।
अपरस वाले भाग को नमक मिले पानी से धोना चाहिये फ़िर उस भाग पर जेतुन का तेल लगाना चहिये।

खाने में नमक वर्जित है।
सेब का सिरका स्किन के pH बैलेंस को सुधारता है और इन्फेक्शन को रोकने में मदद करता है। साथ ही यह स्किन की खुजली और जलन को भी कम करता है। एक गिलास पानी में एक चम्मच आर्गेनिक सेब का सिरका मिलाकर दिन में दो बार सेवन करें। यह उपचार शरीर के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा होता है क्योंकि शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलने में मदद करता है। या फिर, एक कप गर्म पानी में दो चम्मच सेब का सिरका मिलाएं। अब इसमें एक साफ रुई भिगोकर सोरायसिस पर लगायें। ऐसा दिन में दो तीन बार करें।
जैतून का तेल भी सोरायसिस में काफी फायदेमंद होता है क्योंकि यह स्किन को सॉफ्ट बनाके उसकी flaking और scaling को कम करता है। जैतून के तेल को हल्का गर्म करके प्रभावित क्षेत्र में लगायें। ऐसा रोज दो-तीन बार करने से धीरे-धीरे सोरायसिस ठीक हो जायेगा। जैतून के तेल की तरह नारियल का तेल भी सोरायसिस में फायदेमंद होता है।


हल्दी में एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज होती हैं। इसमें curcumin नामक केमिकल कंपाउंड पाया जाता है जो इन्फ्लामेशन से लड़ता है और स्किन की सेल ग्रोथ को बढ़ाने वाले phosphorylase kinase नामक एंजाइम को रोकता है। एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी डालें और स्वादानुसार शहद दाल लें। इसका सेवन रोज करें। आप हल्दी को अपने खाने में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। नोट – यदि आपको पित्ताशय से सम्बंधित कोई समस्या (gallbladder problem) है तो हल्दी का सेवन न करें क्योंकि इससे समस्या और ज्यादा गंभीर हो सकती है। साथ ही, यदि आपको blood clotting issues हैं या आप डायबिटीज की दवाएं लेते हैं तो हल्दी का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें। आप हल्दी को सोरायसिस पर सीधे लगा भी सकते हैं। एक चम्मच हल्दी के पाउडर में जरूरत अनुसार पानी डालकर पेस्ट तैयार करें। अब इसे प्रभावित क्षेत्र में लगायें और ऊपर से कपड़ा बांध लें। इसे रातभर लगा रहने दें और अगले दिन सुबह साफ पानी से धो लें। इस उपचार को भी आप रोज कर सकते हैं।

ध्यान रखने योग्य बातें :
रोज नहायें, लेकिन नहाते समय लेकिन को अत्यधिक रगड़ें नहीं क्योंकि इससे इन्फेक्शन और खुजली और ज्यादा फैल सकती है। सादा साबुन की जगह कोई अच्छी नमी प्रदान करने वाली साबुन का इस्तेमाल करें। सादा साबुन के इस्तेमाल से स्किन ड्राई हो जाती है।

स्किन को नम और साफ बनाये रखें।
स्किन पर अत्यधिक खुजली या खरोंच न करें।
डाइज और परफ्यूम का इस्तेमाल न करें क्योंकि इससे सोरायसिस में irritation बढ़ सकती है।
हल्की धूप में शरीर को सेंकने से भी सोरायसिस के इलाज में मदद मिलाती है। National Psoriasis Foundation के अनुसार धूप सेंकने से स्किन सेल्स का ग्रोथ रेट और शेडिंग की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। रोज कम से कम 30 मिनट के लिए हल्की धूप में अपने शरीर को सेंकें।

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